ईश्वर से एक वार्तालाप

ईश्वर से एक वार्तालाप

रात का समय था। मन के द्वार पर किसी को दस्तक देते सुना मैंने। दरवाजा खोला। एक दिव्यमान प्रकाश, मुझे देखते मुस्कराये, और बोले, मैं ईश्वर हूं। आधी रात का समय था। आँखे नींद से भरी हुई थी। दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था। क्या करूं, क्या कहूं, कुछ समझ में नहीं आ रहा था। कह रहे हैं, ईश्वर हैं,तो क्या मैं मान लूं।

ईश्वर मेरे मन की बात समझ गये। बोले, राही कई तरह के होते है, और राह दिखाने वाले भी ! तुम्हारी मर्जी तुम जिसे स्वीकार करो।

मैंने कहा, आपके नाम से परिचित हैं सभी। देखा किसीने नहीं। कुछ परेशान रहते हैं आपके अस्तित्व को लेकर। कुछ परखना चाहते हैं आपको।

ईश्वर ने कहा, “मुझे परखना एक ख्याली प्रयोग के सामान है। ख़याली प्रयोग, एक ऐसा प्रयोग जो सोचा तो जा सकता है, किया नहीं जा सकता। शायद परिचित होगे इस ख़याली प्रयोग से।

एक काले डब्बे में बंद है एक बिल्ली। पता लगाना है, बिल्ली जीवित है या मृत।

डब्बे के खुलने के बाद ही पता चल सकता है, बिल्ली जीवित है या मृत। बिल्ली का जीवित रहना निर्भर करता है, डब्बे में रखी उस वस्तु पर, जो डब्बे के खुलते ही खो देती है बिल्ली को जीवित रखने की क्षमता। यही है इस प्रयोग की बिडम्बना। मैं एक काले डब्बे में बंद हूँ। मेरी कल्पना की जा सकती है। असंभव है मुझे मापना।

तुम्हारा विस्वास मुझे ज़िंदा रखता है। मैं तुम्हारा काल्पनिक बंधू हूँ ।

मैंने कहा, आप हमें इतनी अच्छी तरह से पहचानते हैं। आपकी क्या धरना है हमारे बारे में । आप के ऊपर हमारी आस्था आपसे प्रेम के कारण है, या डर के कारण।

ईश्वर ने कहा, मैं तो कहूंगा, प्रेम के कारण। किसे सोचने में अच्छा लगता है की कोई उससे डर कर प्रेम करता है। कोई मुझसे क्यों डरेगा। मैं तो सिर्फ एक प्रकाश हूँ। भटके को रास्ता दिखता हूँ।

मुझे पता है, कुछ लोग डर और चाहत के चक्रव्यूह में फंस जाते हैं। जैसा कि हम जानते हैं, समर्पण के आवेग की जड़ें डर में होती हैं। मुझे पता है, कुछ लोग मुझे तब तक याद नहीं करते, जब तक कि वे मुसीबत में न हों। मेरा मानना है की सम्मान डर या विस्मय से नहीं उत्पन्न होता है। अगर कोई किसी को डर के मारे प्यार करता है, तो वह वास्तव में उससे प्यार नहीं करता। वह उस शक्ति से प्यार करता है जिसके बारे में वो समझता है उस व्यक्ति के पास है।

मैंने कहा, बिश्वास एक तरह की सोच है। इसके कई प्रकार हैं। दीपक चोपड़ा की किताब का उल्लेख करते हुए मैंने कहा, कुछ समझते हैं की अगर वो पूजा नहीं करेंगे तो ईश्वर नाराज़ हो जायेंगे। कुछ समझते हैं पूजा करके वो ईश्वर को खुश रख सकते हैं। ईश्वर खुश, तो उनकी हर कोई इच्छा पूरी हो सकती है। कुछ सोचते हैं ईश्वर उन्हें सुख शांति प्रदान करता है और सारे क्लेशों से दूर रखता है। कुछ सोचते हैं उनका ईश्वर पर बिश्वास उन्हें ईश्वर के नज़दीक ले जाता है। शाम का समय था। मन के दैत्यों पर कॉल आते हैं। डोर एक दिव्य प्रकाश, रहस्यमयी मैं, और बोलती हूं, मैं ईश्वर हूं। रात का समय था। आँख से देखा जाता है। काम को बंद कर दिया था। क्या, क्या कहूं, समझ में नहीं आता था। कहो ईश्वर हैं, तो मैं मान लूं।

ईश्वर मेरे मन की बात को ठीक करें। बोले, राही कई तरह के होते है, और राह दिखाने वाले भी! शादी की प्रक्रिया।

यह कहा जाता है, आपके नाम से जाने वाले सभी। किसी को नहीं देखा। कुछ लोग अपने उपस्थिति को पसंद करते हैं। कुछ मोल

ईश्वर ने कहा, "एक ख्याली उपयोगिता के लिए है। ख़्याली का उपयोग करने के लिए, एक्सिस का उपयोग करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। संभावित संभावित होगे इस ख़ाली उपयोगिता से।

एक बिलोबी में बंद है। पता लगाना है, जीवन है या मृत।

डब्बे के बाद चलने के बाद उड़ने वाला है, उड़ने वाला या मृत. बिल्लक अत्याधुनिक, रोबोट में आधुनिक, जो रोबोट के लिए सक्रिय है, वह सक्रिय होगा। इस उपयोग की बिडंबना है। मैं एक बार ड्रोब में हूँ। मेरी कल्पना क्षमता है। हैमिंग मापी जा रही है।

निवास स्थान की ताजा जानकारी। ।

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ईश्वर ने कहा, तो, प्रेम के। जोखिम में यह बहुत ही खतरनाक है। कोई पहचान नहीं। मैं तो एक प्रकाश हूँ। जनता को लोग।

निश्चित रूप से निश्चित है, निश्चित रूप से यह निश्चित है कि यह निश्चित रूप से मौजूद है।.. जैसे कि हम वाट्सएप के हिसाब से बदलते हैं। मुझे पता है, मैं भी परेशान हूं। मेरा कहना है कि यह 'अविश्वसनीय' है। अगर किसी को भी यह पसंद है, तो वह वास्तविक में प्यार करता है। शक्ति .

यह, बिश्वास एक तरह की सोच है। इसके कई प्रकार हैं। . खुश रहने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। ईश्वर को खुश रखने वाला, हर व्यक्ति को हो सकता है। कुछ सोचते हैं ईश्वर उन्हें सुख शांति प्रदान करता है और सारे क्लेशों से दूर रखता है। कुछ भगवान के विश्वास के योग्य बनने के लिए प्रार्थना करते हैं। कुछ ईश्वर का माध्यम बनने की प्रार्थना करते हैं। कुछ ईश्वर के सार्वभौमिक अस्तित्व में विलीन हो जाने के लिये प्रार्थना करते हैं।

मैंने ईश्वर से कहा, मैं आपसे नहीं पूछूंगा की आपने विश्व की रचना क्यों की। आपने जो ठीक सोचा वही किया। मैं आपसे नहीं पूछूंगा की आपने अच्छे के साथ बुरे की रचना क्यों की।

मुझे बीच में टोकते हुए ईश्वर ने कहा, तुम हमें हर समय कटघरे में क्यों खड़ा कर देने की कोशिश करते हो । मैंने न तो कभी किसी के लिये संकट पैदा किया हैं, और न ही कभी किसी के लिए समस्या पैदा करूंगा। यह कभी न सोचना कि मैं पहले तुम्हारे लिये समस्याएँ खड़ी करुँगा और फिर उनका समाधान करूँगा। तुम्हारी समस्याओं से लाभान्वित होना मेरा कभी भी उद्देश्य नहीं रहा है। तुम्हारे पास बुद्धि है। मैं आशा करता हूँ की तुम मुझसे अपेक्षा नहीं करते हो कि मैं बताऊँ की तुम अपनी बुद्धि का प्रयोग कैसे करो । हर समय इस एक बात का हर समय ध्यान रखने की कोशिश करना कि कोई भी समझदार व्यक्ति राक्षस पैदा नहीं करता है। तुम्हे क्या लगता है, मैं इतना असंवेदनशील हूँ। अपनी गलतियों के लिए अपने अपने आप को दोषी ठहराना एक कला है, और यह कला तुम्हे सीखनी चाहिए।

मैंने ईश्वर से माफ़ी मांगी। मैंने कहा, आपकी भावनाओं को आघात पहुंचाने का मेरा कोई अभिप्राय नहीं था। मैं जानता हूँ आपको अपनी सृष्टि पर गर्व है। लेकिन हम में से कुछ आपकी रचना करना चाहते है। क्या यह संभव है?

ईश्वर ने कहा, मुझे कोई परेशानी नहीं, अगर कोई मेरी रचना करना चाहता है। लेकिन, जैसा कि कहा जाता है, यदि संभव हो तो हर मनुष्य ईश्वर बनना चाहेगा। मुझे यकीन है कि तुम जानते हो, एक आदर्श की कल्पना करना और वास्तव में इसे बनाना दो अलग-अलग बातें होती हैं। कार्नोट इंजन की कल्पना करना और वास्तव में 100% कुशल इंजन बनाना दो अलग-अलग चीजें हैं। मुझे खुशी होगी, अगर एक दिन तुम कार्नोट इंजन बना पाओ। समझने की कोशिश करो, कोई तभी कुछ बना सकता है जब उसमे उसको बनाने की क्षमता होती है ।

मैंने कहा, आप कह रहे हैं, यदि मनुष्य ईश्वर की रचना करना चाहता है, तो उसे एक आदर्श मनुष्य की रचना का ज्ञान होना चाहिये । लेकिन आपके शब्दकोश और हमारे शब्दकोश में आदर्श के अर्थ अलग हैं। आपके शब्दकोश में 'आदर्श' का अर्थ परिपूर्ण है। हमारे शब्दकोश में आदर्श में कुछ 'गैर-आदर्श' घटक होते हैं। तदनुसार, यदि मनुष्य एक आदर्श व्यक्ति की अवधारणा करता है, तो उसमे कुछ बेरंग भी शामिल होंगे ।

ईश्वर ने कहा, मुझे बड़ी ख़ुशी है कि तुम वास्तविक दुनिया में विभिन्न रंगों की आवश्यकता को समझते हैं। दिन पर दिन तुम विकसित होते जा रहे हो, और तुम्हारे पास एक प्रश्न करने वाला दिमाग है। तुममे अद्भुत चीजें बनाने की असीम क्षमता है । मुझे वास्तव में तुम पर गर्व है।

मैंने कहा, जो लोग यह मानते हैं कि हम प्राकृतिक चयन से बने हैं, आपके द्वारा नहीं, आप उन्हें क्या कहेंगे?

ईश्वर ने कहा, अपने विश्वास पर विश्वास करना हर एक का अधिकार है। मैं उन्हें सलाह देने वाला कौन होता हूं? यह उनकी समस्या है अगर उन्हें लगता है कि प्राकृतिक चयन और मैं दो अलग चीजें हैं।

मैंने कहा, क्या आप मुझे बता सकते हैं कि आपने हमें क्यों बनाया?

ईश्वर ने कहा, मैंने तुम्हे अपने ही हित में रचा है। मैं अपनी एक और सृष्टि पृथ्वी की जरूरतों को पूरा करना चाहता था। शुरुआत में कई सवाल थे, और सभी के जवाब देने वाला मैं अकेला था। ज्ञान के अंतराल को भरने के लिए मैंने तुम्हारी रचना की । ज्ञान की खाई भरती रही, साथ साथ नए ज्ञान के गड्ढे बनते चले गए । यह प्रक्रिया चलती रहेगी। मैं चाहता हूं कि तुम मुझसे पूरी तरह स्वतंत्र रहो ।

मैंने पूंछा , मुझे बताइये मुझे आपकी आवश्यकता क्यों पड़ती है?

ईश्वर ने कहा, तुम्हे पता होना चाहिए, क्योंकि आवश्यकता तुम्हारी है। मैं केवल अनुमान लगा सकता हूं। हो सकता है, मैं तुम्हारी अंतरात्मा का रक्षक हूं। अगर मैं नहीं हूं तो कुछ भी नहीं है। मेरी अनुपस्थिति में सब कुछ की अनुमति है। तुम तर्क पेश कर सकते हो : तुम्हे पता है कि क्या अनुचित है और क्या नहीं। अगर तुम जानते हो तो यह एक अच्छी बात है।

एक साक्षात्कार में एक पत्रकार पूछता है: तुम क्यों पढ़ते हो? वह व्यक्ति उत्तर देता है: मैं अपने जीवन को नियमित करने के लिए पढ़ता हूं। मुझे लगता है, अगर कोई तुमसे पूछता है: तुमको ईश्वर की आवश्यकता क्यों पड़ती है, शायद तुम यह कहना चाहो : मुझे अपने जीवन को नियमित करने के लिए ईश्वर की आवश्यकता पड़ती है।

क्या आपको लगता है, जरुरत से ज्यादा सृष्टि की रचना की जा रही है ?

ईश्वर ने कहा, "बहुत ज्यादा" या "बहुत कम" व्यक्तिपरक शब्द हैं। पृथ्वी को संतुलित रखना हम सब के लिए महत्वपूर्ण है।

शायद तुम जानते हो , अगर मस्तिष्क को बहुत बड़ा होने दिया जाए, तो वह काम करना बंद कर देगा। हर कोई अपने क्षितिज को समान सीमा तक नहीं बढ़ा सकता है। व्यक्ति किसी वस्तु को 'पूर्ण' देखना चाहता है, लेकिन सीमित समझ के कारण उसका एक अंश ही देख पाता है। सीमित दुनिया के नियम अनंत दुनिया में लागू नहीं होते हैं। यदि इस मूल तत्व को सही भावना से समझा जाए, तो कोई कारण नहीं है कि परिमित और अनंत के बीच मित्रता नहीं हो सकती। किसी भी चीज का निर्माण और उसकी नियमितता तभी संभव है जब मैं और तुम एक दूसरे के साथ हो । मुझे बनाने और समाप्त करने के लिए, और तुम्हे बनाये रखने के लिए बनाया गया है।

मैंने कहा, कुछ आपके असीमित ज्ञान, शक्ति, विस्तार और नैतिक पूर्णता पर सवाल उठाते हैं।

ईश्वर ने कहा, यह बिल्कुल ठीक है। तुम्हे सवाल करना चाहिए। क्या तुमने यह कहावत नहीं सुनी है, "पहले शिक्षक और शिक्षण की जांच करें, और उसके बाद ही उसे स्वीकार करें।" आस्था का अर्थ तर्क का निलम्बन नहीं है। लेकिन मैं तुम्हे यह भी बता दूं कि विश्वास को कभी-कभी किसी तर्क की आवश्यकता नहीं होती है। अक्सर, अपनी कल्पना में, तुम मेरी उपयोगिता बढ़ाते हो। तुम मुझसे कुछ ऐसे काम करने की उम्मीद रखते हो जो तुम्हे नहीं रखने चाहिए। तुमको मेरी सीमाओं की सराहना करना सीखना चाहिए। मेरी उपयोगिता बढ़ाना उचित नहीं है।

मैंने कहा, मैं उलझन में पड़ गया हूँ, तुम एक हो या अनेक।

ईश्वर ने कहा, मैं एक हूं, परन्तु मैं एक समय में एक से अधिक हो सकता हूं।

मैंने कहा, अभी भी आपका वक्तव्य स्पष्ट नहीं है।

ईश्वर ने कहा, जब मैं मानव जैसा जटिल कुछ डिजाइन कर रहा था, तो मैंने कई भूमिकाएँ निभाईं। उदाहरण के लिए, जब मैं आंख डिजाइन कर रहा था तो मुझे अपनी सीमाओं के बारे में पता था। मैं जानता था कि मेरी बनाई आँखें केवल बाहरी दुनिया को ही देख सकती हैं । लेकिन, जैसा कि तुम जानते हो , इतना ही काफी नहीं होता है देखने के लिए । इसलिए मैंने एक दूसरे तरह के विशेषज्ञ की भूमिका में अपने को ढालकर 'दिमाग' विकसित करने का फैसला किया। दिमाग नाम की यह अनोखी चीज आंख बंद करके भी देख सकती है। यदि तुम मुझे जानना चाहते हो तो स्वयं को जानो, और तुम्हे अपने निजी व्यक्तित्व के भ्रम को दूर करना पड़ेगा ।

मैंने पूंछा, हमें बनाते समय क्यों की आपने इतनी गलतियां ?

ईश्वर ने कहा, मैंने जान – बूझकर की गलतियां की। विविधता लाने के लिए गलतियों के सिवाय, है कोई उपाय? अगर तुम मेरा अस्तित्व प्रमाणित करना चाहते हो, तो नहीं कर पाओगे ! क्या असीम को शब्दोंमें या विचारों