उषा में आशा

द्रौपदी को वंचित होना पड़ा मां की छत्रछाया से

वो दस वर्ष की थी

मां के समय से पहले चले जाने से

द्रौपदी बड़ी हो गई, समय से पहले

पिता का भरपूर स्नेह मिला

न मिल सकी मां की ममता

बेटी का मतामत पनपा, समय से पहले

पिता को न दिखा

ऐसे समय द्रौपदी की मुलाकात गोविंद से हुई

गोविंद, महाभारत के मुख्य पात्र की तरह

द्रौपदी के जीवन का मुख्य पात्र बना

अपरिचित से परिचित बना

बना निकट से निकटतम

घनिष्टता बंधन में सीमाबद्ध हुई

गोविंद द्रौपदी का हुआ

किन्तु न हो सका उसके पिता का

गोविंद का मध्यम वर्ग आड़े आया

बेटी को झोंकना नहीं चाहते थे पिता उस वर्ग में

मुश्किल से निकल पाये थे जिस वर्ग से

बेटी ने एक प्रयोग समझकर प्रवेश किया मध्यम वर्ग में

छोड़ना पड़ा उसे पिता का घर, पिता के आशीर्वाद बिना

जिद पूरी हुई, पिता - पुत्री की

दोनो जीते, दोनों हारे

आज़ाद ख्यालों की द्रौपदी सोचने लगी

पिता से मिली आज़ादी के साथ-साथ

पति से मिली आज़ादी के बारे में

समझ में आने लगी उसे, आजादियों की विभिन्नताएं

गोविंद समझ न पाया आज़ादी की बारीकियों को

उसे लगा अगर दे न पाया वो द्रौपदी को

पिता जैसी आज़ादी, हार जायेगा

पिता के अहंकार को वो चुनौती देना चाहता था

जुट पड़ा वो तन-मन-धन से इस अभियान में

समय न रहा उसके पास द्रौपदी के लिये

दोनों के बीच दूरियां बढ़ी

जब दूरियां बढ़ती हैं, ढीले पड़ जाते हैं कुछ बंधन

ऐसे समय, द्रौपदी ने अनुभव किया

अपने अंदर चल रहे एक बंधन को

मातृत्व की सूचना ने दूरियां और बढ़ाई

समयानुसार द्रौपदी मां बनी

उसकी बेटी उसकी सर्वस्य बनी

जकड़ने लगी द्रौपदी बेटी को

मुट्ठी में बालू की तरह

उसे लगा मुट्ठी खोल देगी तो बालू बिखर जायेगी

क्या कोई कैद कर पाया है मुट्ठी में बालू को

क्या कोई भींचकर रख पाया है सुगंध कैद कर हथेली में

मुट्ठी खाली हुई, सुगंध उड़ी

कौन है द्रौपदी की इस दशा का जिम्मेवार

यही प्रश्न मैंने द्रौपदी से किया

उसका उत्तर मैं दोहरा रहा हूं

“दशा इसे मैं क्यों कहूं

मैं एक बेटी हूं, एक पत्नी हूं, एक मां हूं

मेरे हर निर्णय की अधिकारी मैं हूं

कई अँधेरे दूर भगाये हैं मैंने

कई अंधेरे दूर भगाने हैं मुझे

मैं एक बेटी हूं, एक पत्नी हूं, एक मां हूं

मेरे यह अधिकार मैंने स्वयं अर्जित किये हैं

कोई नही छीन सकता है मुझसे मेरे अधिकार

ढेर सारी रोशनी और थोड़े से आकाश की जरुरत है मुझे

उषा में आशा देखी है मैंने”