एक अकेला इस शहर में

क्यों आया उस शहर को छोड़कर

जहां सभी पहचानते थे

नहीं रहना चाहता उस शहर में

जहां सिर्फ औधा पहचान होती है

औधों का शहर अंधा होता है

औधे के सिवा उसे कुछ नहीं दिखता

इस शहर में कोई नहीं पहचानता मुझे

फिर भी आया हूं, अजनबी बनकर

एक उम्र के बाद दोस्त नहीं बनते

भटकता फिर रहा हूं, हमसफ़र की तलाश में