एक बेटे की कहानी

आरक्षण स्थल पर बैठा वो युवक

निर्दिष्ट कार्यों के साथ कर रहा था

क्रमबाह्य आररक्षण, कुछ अति विशिष्ट व्यक्तियों के

अकस्मात् एक बृद्धा को आते देखा उसने

परेशान, घबराई सी

छूट गयी थी उसकी जयपुर वाली गाड़ी

उसका बेटा रहता है जयपुर में

आरक्षण चाहिये, किसी हाल में

अगली गाड़ी में

काउंटर पर बैठे बेटे ने माँ का दर्द समझा

माँ को आरक्षण मिला

माँ खुश हुई, धन्यवाद जताया

साथ ही रख दिये बेटे की हथेली में

कुछ रुपये, सौजन्य स्वरुप

बेटा मर्माहत हुआ, उसने कुछ न कहा

मन ही मन बड़बड़ाया

कैसे धोखा दे सकता हूँ एक माँ को


STORY OF A SON


The young man

Sitting at the reservation counter

Of the Railway station

Was busy doing out-of-turn reservation

For some VIPs

The young man saw an old lady

Coming near the counter, disturbed

She missed her train for Jaipur

Her son lives there

She wants reservation in the next train

Some way or the other

The Son sitting at the counter

Understood a mother's pain

Mother got the reservation

She was happy

She thanked the son

And, as is customary

She placed a few coins

In the palm of the son

The Son couldn't say a thing

Simply murmured

How can I cheat a mother?