वज़न चिड़िया जैसा

वज़न चिड़िया जैसा

धड़कता दिल पहचान है

चाहता है जुड़ना संबंधों से

चाहता है देखना अपनी नज़र से

देखता है लेकिन दूसरों की नज़र से

औरों तक पहुंचने की कोशिश में

भागता फिरता है अपने से दूर

चाहते हैं सब, ज़रूरत है सबको

कुछ ही हैं, कह सके अपना जिनको

पोथी विद्या पढ़ी नहीं

तर्क बुद्धि मिली नहीं

ज्ञान बोझ बना नहीं

रिश्तों की भीड़ है

आत्मीयता का भ्रम नहीं

सहज बिश्वास का ज्ञान है

पता नहीं किस मिटटी का बना है

यह भला मानुष