कविता

कविता , स्वयं की खोज है

मन को मन की भाषा में

भाषित करने का नाम कविता है

शब्दों को मन-मरजी

तोड़ने -मोड़ने का अधिकार देती है कविता

कवि अपने कंठ में चुप्पी की गांठ बांधे

इधर-उधर देखता-फिरता है

घूमता है अपने साथ लेकर

अपने आकाश को, अपनी धरती को

समय के बहाव को शब्दों के माध्यम से

कैद करती है कविता

इस आशा में

शायद उसे कही मिल जाए

जिसकी उसे तलाश है

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© 2017 by Dr Purnendu Ghosh