फिर से देखो उस बिंदु की ओर

फिर से देखो उस बिंदु की ओर

इस बिंदु में हैं वो सभी

जिन्हें हम जानते हैं

जिनके बारे में हमने सुन रखा है

हर महापुरुष, हर कापुरुष

हर नायक, खलनायक

हर सभ्यता का निर्माता और विध्वंग्शक

हर नैतिकता का शिक्षक

हर पुष्ट और भ्रष्ट राजनेता

इस बिंदु में उपस्थित हैं, सामूहिक रूप में

हमारे सुख-दुःख, हमारे धर्म, हमारे विश्वास

हमारी विचारधाराएं और आर्थिक सिद्धांत

धुल के एक कण की तरह निलंबित है ये बिंदु

इस बृहत् अंधकारमय आकाश में अपना सूरज साथ लिए

इस बिंदु को हमने अपनी तरह से सींचा है

हम संरक्षक हैं इस बिंदु के

इस बिंदु की देख-रेख का अधिकार भी हमारा है

फिर से देखो उस बिंदु की ओर