लेखक

क्या लेखक लिखता है अपनी शुद्धिकरण के लिए

या अपने अमरत्व की प्रत्याशा में

शायद दोनों ही शामिल शायद दोनों ही शामिल होते हैं

लेखक के लेखन में

लिखना अनिवार्य हो जाता है

इसलिए लेखक लिखता है

लेखन को दिनचर्या में शामिल न करे

दिनचर्या अधूरी रह जाती है

अधूरा रह जाता है कुछ कहना

जरूरी नहीं है कुछ जरूरी बातें लिखना

जरुरी होता है कुछ लिखना

लिखकर सपने देखना अच्छा लगता है

अंतरात्मा तक पहुँचने का

इससे सहज उपाय है और कोई

खुद को सीमाओं में लिपिबद्ध रखने का

है कोई सूयोग्य अवलम्बन

छुपी प्रतिभा को खुद से मिलवाने का

है कोई और सुचारु उपाय

शुद्धिकरण या अमरत्व की प्रत्याशा से परे

कुछ पल सम्हालकर रखने योग्य होते हैं

शायद उन पलों को सम्हालकर रखने के लिए

लेखक लिखता है

दिनकर की भाषा में

कोई रचना सिर्फ दाहिने हाथ से नहीं लिखी जाती है

"जब मन ऊबने लगता है

और प्रतिभा आगे बढ़ने से इंकार कर देती है

तब हमारा उपेक्षित बांया हाथ

हमारी सहायता को आगे बढ़ता है

मगर बेचारा बांया हाथ। .....

वो चमत्कार तो क्या दिखलाये

कवि की कठिनाइओं का

कुछ पर्दा ही खोल देता है

कमज़ोरियों को ढकने के लिए

कवि को नाना कौशलों से

काम लेना पड़ता है "

शायद लेखक अपने लिए लिखता हूँ

दूसरों की आड़ लेकर

यह जानते हुए भी की

लेखन अहंकार का एक रूप मात्र है

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© 2017 by Dr Purnendu Ghosh