तलाश जारी है

उनके शहर पहुँचते ही मैंने पूंछा

यादव जी कहाँ मिलेंगे

कौन से यादव जी

मुलायम, लालू, शरद, अखिलेश

तो रहते नहीं यहाँ

मैंने कहा, बंसी वाले

नाम तो पहले नहीं सुना, पहले ने कहा

दूसरे ने कहा, नाम तो सुना सा लगता है

हैं या थे, क्या करते हैं, आपके यादव जी

मैंने कहा, शिशु सुलभ स्वाभाव उनका

शिक्षक थे, और हैं भी

तीसरा हमारी बातें सुन रहा था ध्यानपूर्वक

बोला, सच में मिलना चाहते हो यादव जी से

मैंने कहा, अरे भाई तभी तो आ रहा हूँ इतनी दूर से

क्यों आये इतनी दूर से उनसे मिलने, तीसरा बोला

उनसे मिलना ही था तो जाते स्वयं के पास

समझ न आई मेरी, तीसरे की बात

अगर होते मेरे पास तो क्यों न मिले

बोला वो, कभी देखा ही नहीं तुमने खुद को

कौन हो भाई, सब-जानता से लगते हो

तलाशने निकले जिनको, पहचानते नहीं उनको

फिर न दिखे यादव जी, तलाश जारी है