बहुत पुरानी बात है

पुरानी बातें शायद कुछ ज्यादा ही याद रहती है

कल जो हुआ, भूल गया

शायद भूलने लायक थी, कल जो हुआ

आज जो हुआ, भूलने वाली नहीं

कुछ समय से, मैं एक दोस्त के बारे में सोच रहा था

दोस्त से बिछड़े कई वर्ष बीत गए

कॉलेज के बाद फिर न मिले कभी

न मिला उसका ठौर ठिकाना

इंटरनेट के दौर में भी ये संभव है

सोचकर अजीब सा लगता है

सोचता रहा, शायद राह चलते कही दिख जाये

लेकिन न दिखा, आज अचानक सरे राह चलते-चलते

एक सहपाठी से मुलाक़ात हो गई

उससे पूंछा अपने दोस्त के बारे में

उसने कहा, खबर लेने में थोड़ी देर कर दी मैंने

उसे खबर थी मेरे दोस्त की

इसी शहर में उसकी बेटी रहती है

उसीसे मिलने आया था मेरा सहपाठी

बेटी से मेरा परिचय करवाया

बेटी ने कहा, बहुत कुछ सुन रखा है उसने मेरे बारे में, अपने पापा से

पापा की चहेती को जानकार दुःख हुआ

एक ही शहर में दो दोस्त रह रहे थे अनजान बने

एक दूसरे से मिलने की आश में

यादें ताज़ा कर जाती हैं, हम क्या थे

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© 2017 by Dr Purnendu Ghosh