बोन्साई २

तुम कहते हो प्रकति ने नहीं

वास्तु ने बनाया है मुझे

क्या तुम्हे लगता है

वास्तु बना सकता है मुझे

अगर प्रकति न होती

कैसे पहचानते मुझे

आकार में छोटी हो गयी हूँ

दोष नहीं है मेरा

बगीचे की शोभा न रहकर

कमरे की शोभा बन गयी हूँ

क्यों क़ैद कर रखा है

आज़ाद कर दो मुझे

फिर देखो कैसे

वन की चिड़िया कैसे

वन वन शोर करे