इस सूने गलियारे में फिर से मधुर गीत गाना है

हर युग में अँधा युग आया है

हर युग को खोलनी पड़ी है

आँखों में लगी पट्टी

पट्टियों की परते पड़ी हुई है

इस युग में

आओ मिलकर खोले गांठे

पट्टियों की

आओ मिलकर समेटे

बिखर चुकी मर्यादा को

होता रहेगा हार जीत का फैसला

आओ मिलकर जीते अंधेपन को

जीतना है भय का अन्धापन

अधिकारों का अन्धापन

जीतना है अशुभ को, असुंदर को

धर्मवीर बनकर

इस सूने गलियारे में फिर से

मधुर गीत गाना है