दूरबीन

दूर खड़ा दूरबीन से उस द्वीप को देख रहा था कितना अलग सा था मेरा साथी बन गया कब औरों का हो गया पता न चला इतना दूर चला गया देखने के लिए ज़रूरत पड़ने लगी दूरबीन की तमन्ना न रही पास जाने की कभी जो नज़दीकियां थीं दूरियां बन गयी