रैन बसेरा

तीन परिवार, एक दूसरे से बिलकुल अलग

साथ साथ रहते थे , साठ साल पहले

रैन बसेरा में

कपूर साहब की थी अपनी दुनिया

राठौर साहब के थे अपने ठाठ

घोष बाबू अपनी धुन में मस्त

उस युग में, नल का पानी पीने योग्य होता था

बीयर का युग युवा पीढ़ी में इतना न समाया था

फ़िल्टर की या बोतल की ज़रूरत न पड़ती थी पीने के पानी के लिए

राम राज्य था, लेकिन, पानी की किल्लत उस युग में भी थी

उस युग में, इंसान मरने से या बीमार पड़ने से इतना न खबराता था, जितना आज के लोग

हर बीमारी का मिक्सचर मौजूद था हमारे डाक्टर राजेन सेन के पास

रैन बसेरा आज भी है

पानी की किल्लत आज भी है

सिर्फ कपूर साहब, राठौर साहब, घोष बाबू न रहे रैन बसेरा में

रैन बसेरा आज भी उनका इंतज़ार करता है