अन्धकार उपहार

कुछ की दृष्टि-क्षति दृष्टि का अंत नहीं करती है

अंधकार प्रकाशित करता है

जिनके पास दृश्य-कल्पना का अपार भंडार होता है

उनके पास दृष्टिहीनता एक विरोधाभासी उपहार बनकर आती है

वे देख सकते हैं प्रकाश को फैलते, सिमटते

वे ध्वनि में प्रकाश का अनुभव कर सकते हैं

चोट लगने या गिरने से नहीं डरते वे

लेकिन डरते हैं पृथकत्व से

प्रकाश फीकी लगती है जब वे अकेले होते हैं

बंद आँखे देती हैं उन्हें अत्यधिक सुख

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© 2017 by Dr Purnendu Ghosh