वायरस

वायरस के इस वातावरण में, आबद्ध घर में बैठे हुये हैं हम। रास्तों पर मोटर हॉर्न से अधिक, हवा की सांय सांय सुनाई पड़ रही है। स्कूलों में छुट्टी है, घर बैठकर काम करने की अनुमति है। न सुबह की भगदड़, न शाम घर लौटने का इंतज़ार, घर घर जैसा लग रहा है। मालूम न था कितनी बातें जमी पड़ी हैं, करने को, अपनों के बीच। कितने रिश्ते जुड़ने की कोशिश में लगे हुए हैं, कितने दादी-नानी के सिखाये नुस्खे काम आ रहे हैं। एक शत्रु के धरती पर आने से, कितनी शत्रुताएं कम हो जाती हैं। कितने प्रेम दृढ हो जाते हैं। समय बड़ा बलवान है। परन्तु अधिक बलवान है प्रकृति। प्रकृति की अवहेलना प्रतीक है वायरस का आगमन। युग युगांतर से चली आ रही है यह लड़ाई। स्वच्छ वातावरण, सुन्दर मन और नमस्ते में छुपी हुई है, वायरस को मात देने की योग्यता। जैसे हर बार लड़े हैं, आओ मिलकर साथ लड़े। बनाये स्वच्छ वातावरण और सुन्दर मन। वायरस विज्ञान है तो कला भी है।

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