लॉक डाउन

लॉक डाउन खुलने के बाद

कुछ नई स्थितियों का अंदेशा है

बड़े बड़े प्रश्नों के बीच

कुछ छोटे प्रश्न भी उठ रहे हैं

दुख भरे दिन बीते रे भैय्या

सुख भरे आयो रे, या

सुख भरे दिन बीते रे भैय्या

दुख भरे दिन आयो रे, आनेवाला है ?

दुख में सुमिरन सब करे

आस्था की क्रमागत वृद्धि की आशंका

सार्वजनिक पूजा स्थल बंद पड़े हैं

आंगन की तुलसी के क्या दिन फिरने वाले है?

क्या हवा का रुख बदलेगा ?

क्या शाहजहां

अपने कैदखाने से

ताज की चांदनी फिर से देख पाएगा ?

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© 2017 by Dr Purnendu Ghosh