हार जीत

उस दिन मैं हरे रंग की साइकिल चला रहा था

मेरा मुकाबला काले रंग की गाड़ी से था

बीचोबीच सपना टूट गया, देख न पाया

मुकाबले में कौन जीता, हरा या काला

साइकिल हारा तो किससे हारा

गाड़ी जीती तो किससे जीती

गाड़ी में जो बैठा था वही तो साइकिल चला रहा था

सिर्फ परिस्थितियां विभिन्न थी

प्रगति के इस दौर में हर हार बुरी मानी जाती है

जीतकर भी इंसान हार जाता है

किसके हाथों सौंपू हार-जीत का फैसला

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© 2017 by Dr Purnendu Ghosh